इलाहाबाद-सपा की वरिष्ट नेत्री सबीहा मोहानी ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से अपने फेसबुक वॉल के ज़रिए पूछा कि Respected
Ex Cm Akhilesh Yadav
राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश

#ज़ख़्म_जो_दिखते_नहीं_वो_दुखते_बहुत_हैं

किसी को नाराज़गी हो हुआ करे बुरा लगे लगा करे आपसे हमारी रोटिया नहीं चलतीं हमारे बच्चों की फ़ीस नहीं देते बीमार होने पर इलाज आप नहीं कराते पहनने को कपडे नहीं देते , और न हमारे दुःख दर्द हमारे मसाएल में आप खड़े होते हो …फिर आप कहाँ से हमारे रहनुमा, हमारे क़ाएद हमारे रहबर हो गए आप से सिर्फ इतना कहना चाहती हूँ हमारा समाज जो की समाजवादी पार्टी की विचारधारा से जुड़ा हुआ है वो उम्मीद करता है की आप हमारे दुःख दर्द में शामिल हों हमारे मसाएल के लिए कुछ न सही आवाज़ तो बुलंद करें लेकिन ये कहते हुए बेहद अफ़सोस होता है की बेगुनाहों को मॉब लिंचिंग में मारा गया आप ख़ामोश रहे गाय , लव जिहाद के नाम पर मारा गया आप ख़ामोश रहे अभी हाल ही में अलीगढ में दो मासूमो मुस्तक़ीम नौशाद को फ़र्ज़ी मुटभेड़ में मार दिया गया आप ख़ामोश रहे न तो आपने कोई प्रतिनिधि मंडल भेजा न 16 साल के नौशाद की बिलखती गरीब माँ के आंसू पोछे …बेशक वो गैरीब परिवार से हैं बेशक उनके पास खाने को रोटी नहीं तन पर फटे कपडे हैं और बैठने को दो गज़ ज़मीन नहीं ….लेकिन उनका लाल मारा गया उनका दिल भी खून के आंसू रोया और हमारा मुस्लिम समाज आपकी ओर उम्मीद भरी नज़रों से देखता रहा …लेकिन आपके इर्द गिर्द रहने वालों लोगों ने या तो सच्चाई आपको नहीं बताई या आपने दो लफ्ज़ उनकी हमदर्दी में बोलने की ज़हमत गवारा नहीं की ….लेकिन आखिर क्यों …?????
ये सवाल पूछने का हमे और तमाम समाजवादियों को हक़ है सिर्फ नौशाद और मुस्तक़ीम ही नहीं जितेन्द्र यादव, का गरीब परिवार अमित गुर्जर आज़मगढ़ के मुकेश राजभर का गरीब परिवार भी उम्मीद भरी नज़रों से आपका इन्तिज़ार कर रहा है ….क्या हम या हमारा समाज सिर्फ बिरयानी में पड़ा तेजपत्ता हैं ….हमारे समाज के MLA हो MP हो राज्यसभा सदस्य हो उनमे या तो हिम्मत नहीं या खुदगर्ज़ है मौक़ापरस्त हैं की आपसे ये नहीं पूछते आखिर क्यों ….????
आपको ये डर है की मुस्लिम समाज के लिए बोले तो कट्टर हिन्दू आपको वोट नहीं देगा …तो यक़ीनन वो आपको वोट नहीं देगा , वोट तो आपको यही यादव और मुस्लमल ही देगा और देता चला आया है अभी भी वक़्त है आप उस सोच से निकलिये हम सिर्फ वोटों का ज़खीरा नहीं हमारे अंदर भी दिल धड़कता हमे भी दर्द होता है हमारा भी एक दिमाग़ है जो आप सब की तरह सोचता है …हम समाजवादी हैं और समाजवादी विचारधारा से जुड़े हैं समाज की आखरी लाइन में बैठे इंसान के आंसू पोछना गैर बराबरी को खत्म करना लेकिन समाजवाद तो लुप्त हो चूका है अब सिर्फ पार्टी है मैं उस पार्टी के मुख्या तक सन्देश देना चाहती हूँ  मुतकीम,  जितेन्द्र,  नौशाद , अमित गुर्जर भी इंसान थे उनकी माँओं उनकी विधवाओ के आंसू पोछिए और उनकी आवाज़ बनिए …!!

अन्धभक्त  और चापलूस दूर रहें ….माँ के अंचल में बीवी के घूंघट की ओट में छुप कर मुँह छुपाने मुस्लमान  दूर से ही दबे पांव निकल लेंगे

कोई भी मुझसे ये सवाल तो बिलकुल भी न #करें_की_मोर्चे_में_चली_गईं_क्या_ये_सवाल_बिलकुल_नहीं….
बिन भेजे वाले सीधे इलज़ाम लगते हैं और मैं उनसे ज़्यादा बद्तमीज़ हूँ
इस लिए फ़ालतू का कमेंट करने से बचे सच के साथ सिर्फ समाजवादी विचारधारा के लोग ही खड़े होते हैं
आज बस इतना …!

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